Saturday, November 3, 2007

दर्द का अहसास

दर्द के अहसास को कब से सम्हाले हम
घूमते फ़िरते हैं इस बेदर्द दुनिया में.
तुम कहां हो कब मिलोगे कुछ नहीं मालूम
यूं ही बरबस हम पडे हैं गम फ़रोशी में

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