Friday, March 28, 2008

svapn

जीवन के जो पल चले गये..
एक अलसाइ दुपहरिया में
बोझल मद्धिम सी आंखो के
आगे क्यों नर्तन करते है?

वो धूल भरि पगडंडी,
वो अध मंजराइ अमराइ
वो चापाकल के शीतल मे
मंडराती थी भ्रमराइ