चार दिनों के अपने हरिद्वार की सैर के बाद हम फ़िर आज दिल्ली वापस लौट रहें हैं. शुक्रवार की रात मसूरी एक्स्प्रेस से हमने हरिद्वार की ओर रुख किया था. यात्रा तो साधारण ही रही. मात्र दो सौ कि.मी. की दूरी को यह ट्रेन आराम से सात घन्टे में पूरी करती है.गनीमत यह है कि पूरी यात्रा हम सोते सोते ही बिता देते हैं.
सुबह छः बजे हम ज्वालापुर स्टेशन पहुँच गये. हरिद्वार शहर से ठीक पहले स्थित यह स्टेशन निहायत ही मामूली है. इतना मामूली कि ठीक से उतरने के लिये चबूतरा भी नहीं था. खैर फ़िर भी किसी तरह हम उतरने में कामयाब हुये, जल्दीबाजी इसलिये भी क्योंकि यहां पर ट्रेन मात्र दो मिनट के लिये रुकती थी.
पापाजी थोडी विलम्ब के बाद कार ले कर आ गये और मैं कार चला कर शिवालिक नगर ले कर आ गया. पहला दिन तो बडे आराम से सोते सोते बीता. बीच में कुछ देर के लिये मैं बस खाना खाने के लिये उठा. मेरी इन हरकतों की वजह से मेरी पत्नी ने मेरी कुछ कम खिचाइ नहीं की.
दूसरा दिन रविवार था.दोपहर में हम सब दक्ष मंदिर एवं हर की पैडी गये. मेरी पत्नी दक्ष मंदिर पहली बार गयीं थीं.
तीसरा और चौथा दिन सोने में बीता और चौथे दिन के रात हम लोग मसूरी एक्स्प्रेस से वापस लौत आये.
Wednesday, January 9, 2008
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