Thursday, October 4, 2007

दूरी

किस तरह मज़बूर हूँ....बेबस
मैं तुमसे दूर
दर्द का अहसास है.....बेहद
मगर मंज़ूर.
देख मैं सकता नहीं....तुमकॊ
पराए प्रीत में
गा नहीं सकता खुशी के....साथ
बरबस गीत मैं.
तुम नहीं समझोगी क्या है
हाल मेरा जी अभी
ज़िन्दगी का स्वप्न.... देखे थे
तेरे संग भी कभी.
आज वह हालात हैं....महसूस
होता है हमें
बीच दरिया में हैं.....कश्ति
हाथ ना पतवार है.

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